संग्रह · 10 लेख
रिसर्च
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भारत की हर लिस्टेड कंपनी में ₹100: 2026 कैसा रहा
1 जनवरी 2026 को मेन बोर्ड और SME की 5,352 लिस्टेड कंपनियों में से हर एक में बराबर ₹100, जिनका हिसाब 26 अक्टूबर 2026 तक रखा गया, स्प्लिट, बोनस, डीमर्जर, मर्जर और डिविडेंड को गिनकर। जो कंपनियाँ 1 जनवरी को ट्रेड नहीं हुईं, उन्हें उनके उससे पहले के आख़िरी दाम पर ख़रीदा गया है। कुल रकम Nifty के मुक़ाबले कहीं बेहतर टिकी रही, आम कंपनी में पैसा घटा, और SME कंपनियाँ दोनों तरफ़ ज़्यादा झूलीं।
विदेशी बनाम भारतीय निवेशक: अब असल में Nifty को कौन चलाता है?
घरेलू संस्थाओं ने 2025 में रिकॉर्ड ₹7.88 लाख करोड़ के भारतीय शेयर ख़रीदे, और अब NSE पर लिस्टेड कंपनियों में उनका हिस्सा विदेशी निवेशकों से ज़्यादा है। पैसे के आने-जाने पर, हिस्सेदारी में आए बदलाव पर, और इस जाँच पर एक सीधी नज़र कि क्या विदेशी बिक्री अब भी Nifty को नीचे खींचती है।
मुहूर्त ट्रेडिंग: क्या दिवाली का सेशन आने वाले साल के बारे में कुछ बताता है?
मैंने 2005 से 2025 तक NSE के हर मुहूर्त ट्रेडिंग सेशन का डेटा इकट्ठा किया, और जाँचा कि दिवाली का सेशन बढ़त में रहा या गिरावट में, इससे उसके बाद आने वाले संवत वर्ष के बारे में कुछ पता चलता था या नहीं। कुछ पता नहीं चला।
छोटे शहरों से म्यूचुअल फंड का पैसा: टॉप 30 शहरों के बाहर से कितना आता है?
टॉप 30 शहरों के बाहर (B30) से आने वाले म्यूचुअल फंड पैसे पर AMFI के डेटा की आसान भाषा में पड़ताल: 2018 से 2026 तक यह हिस्सा कैसे बदला, छोटे शहरों का ज़्यादातर पैसा इक्विटी फंड में क्यों है, प्रति व्यक्ति के हिसाब से राज्यों की तुलना कैसी है, और SEBI के B30 इंसेंटिव का क्या हुआ।
भूला हुआ पैसा: वे शेयर और डिविडेंड जिन पर किसी ने दावा नहीं किया
जब किसी डिविडेंड पर सात साल तक दावा नहीं होता, तो वह पैसा और उसके पीछे के शेयर इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड में चले जाते हैं। आसान भाषा में समझिए कि यह ढेर कितना बड़ा है, कितने कम लोगों को उनका पैसा वापस मिलता है, और दावे की प्रक्रिया कैसे काम करती है।
भारत का शेयर बाज़ार किससे बना है: 4,300 कंपनियाँ, छाँटकर देखीं
NSE और BSE के मेन बोर्ड पर लगभग 4,300 कंपनियाँ लिस्टेड हैं। इनमें से कुछ सौ कंपनियाँ बाज़ार की लगभग सारी वैल्यू बनाती हैं। आम कंपनी 36 साल पुरानी है, और एक तिहाई कंपनियाँ महाराष्ट्र में रजिस्टर्ड हैं।
SME IPO की दीवानगी, 2020 से 2026: लिस्टिंग के उछाल के बाद क्या हुआ
भारत में SME IPO के बूम में, जितने के शेयर बिक्री पर थे, निवेशकों ने उसके करीब-करीब 100 गुना की बोलियाँ लगाईं। मैंने NSE Emerge के 517 IPO का अध्ययन किया और पाया कि लिस्टिंग के बाद आम IPO, SME बाज़ार से काफ़ी पीछे रह गया। पहले दिन सबसे बड़े उछाल वाले IPO उसके बाद सबसे खराब IPO में शामिल थे।
SIP मशीन: हर महीने के ₹32,000 करोड़ ने भारत का शेयर बाज़ार कैसे बदला
भारतीय अब SIP के ज़रिए हर महीने ₹32,297 करोड़ म्यूचुअल फंड में डालते हैं, जो 2020 के मुक़ाबले लगभग चार गुना है। आसान भाषा में समझिए कि SIP का पैसा बाज़ार का सबसे स्थिर खरीदार कैसे बना, SIP काम करती है या नहीं, और क्या गड़बड़ हो सकती है।
भारत में F&O का नुकसान: पाँच साल में ₹3.85 लाख करोड़
FY22 से FY26 के बीच आम ट्रेडरों ने F&O में लगभग ₹3.85 लाख करोड़ गँवाए, और हर साल लगभग 10 में से 9 को नुकसान हुआ। SEBI के डेटा पर एक आसान नज़र: किसे नुकसान हुआ, क्यों हुआ, और 2024 के नियमों के बाद क्या बदला।
भारत में डीमैट खातों का उछाल: शेयरों में पहले से कितना ज़्यादा पैसा गया
भारत में डीमैट खाते 2020 में 4 करोड़ थे, जो 2026 में लगभग 24 करोड़ हो गए। आसान भाषा में समझिए कि इनमें असली निवेशक कितने हैं, उन्होंने 2000 के दशक के मुक़ाबले कितना पैसा लगाया, और अब बाज़ार का मालिक कौन है।